Wednesday, September 28, 2022

छोटी सी मुस्कान

एक छोटी सी मुस्कान

बात कल की है किसी काम से बस में बैठी और दुनियां की चिकचिक से ख़ुद को दूर करने के लिए कान में एअरफ़ोन लगा कर ग़ज़ल सुनने लगी। 
हालांकि मौसम के मिज़ाज और शरीर की थकान ने आंखों को नींद के सागर में डुबाने की भरपूर कोशिशें की।
अब एक वक़्त पर हमने भी हथियार छोड़ ही दिये और नींद के आग़ोश में जाने लगे । तभी रास्ते पर लगे ट्रैफिक और गर्मी ने आंखों के पटल को थोड़ा खोलने पर मजबूर कर दिया । अध खुली आंखों ने खिड़की से बाहर  देखते हुए ; एक स्कूल बस को देखना मुनासिब समझा।
थकी -भारी आंखें, मायूस और गुमसुम चेहरे पर उस समय मुस्कान फैला गयी जब बस में बैठे एक मासूम बच्चे ने बिना किसी जान पहचान के मेरी तरफ़ देखते ही अपना हाथ (बाई करने की मुद्रा में ) हिलाया।
उसकी मासूमियत और मुस्कुराता चेहरा जिस पर कोई कपट नहीं , मुझे जिंदगी का एक प्यारा फ़लसफ़ा समझा गयी कि जिंदगी बहुत छोटी, सरल और दयावान है बस ख़ुद को ख़ुद से(अपने अहम से) ऊपर उठाने के जरूरत है ।  जब सबको यहां से जाना ही है तो एक मासूम मुस्कान देने में क्या हर्ज़ है। उस एक मुस्कान ने मेरी थकान,पीड़ा को ख़त्म कर दिया और फिर हर समय बस एक मुस्कान लिए मैं बाहर से घर भी आई।

न जाने कब बड़े हो गये। चिंता , अवसाद, क्रोध, पीड़ा, अपमान, सम्मान जैसी अनगिनत भावों से भर गए।जिंदगी बस जीना मांगती है हम इसे जटिल करते चलते है क्योंकि हम जीवन को तुच्छ समझ बैठे है। बस भाग रहे है जीवन को सुगम बनाने को लेकिन उसकी सुगमता है किसमें ? 

इस सवाल के जबाब को ढूंढना नहीं चाहते है। बस अपनों या आस-पास से जीवन रूपी प्रतियोगिता जीतने की चाह है । मानो हम जीवन यात्रा में नहीं बल्कि जीवन की इस दौड़ में प्रतिभागी है। जहां यात्रा का आनंद नहीं लिया जाता , अनुभवों से सीखा नहीं जाता बस जीतने की चाह होती है उस भौतिकता से डूबी मंजिल तक पहुँचने की चाह होती है जहाँ का कोई अंत नहीं होता। 
अब तो भावनाएं भी समय के अनुरूप ही कम- ज्यादा होती जा रही है या सच कहूं तो झूठी होती जा रही है। इंसान के स्वार्थ ने उसे भावनात्मक रूप से इतना ढ़ोंगी बना दिया है कि भावनायों का उपयोग भी समय की मांग के अनुरूप  अब किया जाता है।
हम सब इस दिखावे से बहुत दूर थे।
कभी या अभी भी दूर हो सकते है। बस जरूरी है अंदर बैठे उस मासूम बच्चे को जगाने की।

बात जिंदगी को सरल करने की है। उसे जटिल बनाने की नही । यह शुरआत एक छोटी  मुस्कान भी बन सकती है।
Priyankakhare
मीरांत
21।9।22
छाया क्रेडिट-गूगल


No comments:

Post a Comment

छोटी सी मुस्कान

एक छोटी सी मुस्कान बात कल की है किसी काम से बस में बैठी और दुनियां की चिकचिक से ख़ुद को दूर करने के लिए कान में एअरफ़ोन लगा कर ग़ज़ल...