Saturday, May 19, 2018

ख्याल

अक्सर,
लिखकर छोड़ देती हूँ
नाम उसका
कागज के एक टुकड़े पे
इस ख्याल से
कि
शायद वो मेरी खामोशियों को पढ़ ले.....
                     प्रियंका श्री
                     19/5/18

4 comments:

  1. ख़ामोशियों की ज़ुबान बस प्रेम पढ़ सकता है ...
    अच्छा ख़याल ...

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  2. सुन्दर प्रस्तुति !
    आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !

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  3. मोहब्बत तो मरता नही काश तेरे एहसास में मै जिंदा होता...

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