Tuesday, May 1, 2018

मकान

वो ईट पत्थरों से बने हुए मकान
वो बनकर बेजान पड़े हुए है मकान
दिखने में जो आलीशान है मगर
रूह से जुदा हुए वो मकान
कितने मायूस दिखते है वो
अंदर से जो तबाह हुए मकान
ज़मीन से जुड़े हुए है जो मगर
फिर भी वीरान पड़े हुए मकान
उनसे अच्छे तो परिंदों के वो घर होते है
जो कच्चे होते है मगर प्यार में बसे होते है
                             ~प्रियंका"श्री"
                                2/5/18

7 comments:

  1. उनसे अच्छे तो परिंदों के वो घर होते है
    जो कच्चे होते है मगर प्यार में बसे होते है

    बहुत ख़ूब... वाह👌👌👌👏👏👏

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  2. वाह बहुत सुन्दर बात कही आपने काव्य के माध्यम से
    सुंदर रचना।

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  3. वाह!बहुत खूब!

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  4. sundar rachna... kaash ye makaan ghar ban jaayen

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  5. बहुत ही उम्दा👌

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