Monday, December 4, 2017

न काटो हमको काट के तुम क्या पाओगे

       न काटो हमको काट के तुम क्या पाओगे
सुखा सा पेड़ ,
दल,पुष्प मुक्त ,
किये धारण शाखाएं।
पृथ्वी में जड़ जमाये,
अकड़ कर खड़ा ।
पर,
नयन अश्रु से भरे उसके,
प्रतीत ऐसे आंखों को आये।
देख-देख जब चारों दिशाओं,
सोच विचार बारम्बार करे।
मुझमे अब कोई जीवन नही ,
फिर भी खड़ा निहार करे।
देखते ही देखते,
कट गए हरे भरे पेड़ सारे।
जीवनयुक्त पेड़ पौधों का,
क्यों न तू सम्मान करें।
तू समक्ष मेरे काट रहा,
हरित स्कंध ,
तुझे दया उन पर न आये।
क्यूँ बुद्धि से हटके तू ऐसे काम करें,
क्या भविष्य से अवगत नही तू,
या जानबूझकर ऐसे क्रियाकलापों में पड़े।
मैं ही आरम्भ और अंत भी मैं,
आधार भी मैं,
मेरे बिना कही जीवन न पाया जाए।
हरियाली बिन जीवन कैसा ,
निर्बुद्धि तुझे ये समझ क्यों न आये।
अपनी ही जाति को,
दुर्भाग्य के अंधेरों में डाल तू रहा।
हम बिन न पायेगा स्वच्छ वायु भी,
इस ओर ध्यान तेरा क्यों न जाये।
क्यों अपनी ही मानव जाति का,
तू सर्वनाश करें।
कैसे मिटा पायेगा अपनी भूख,
गर हम सब कट जायेंगे।
बिन पेड़ पौधों के जब,
बादल भी न बन पाएँगे,
न चमकेगी बिजली,
न बारिश के मौसम आएँगे।
जब न रहेगे हम,
हो जाएगी बंजर ,जमीन।
न मिलगे स्वादिष्ट फल,
न अनाज उग पायेंगे,
उपचार की जड़ीबूटियां के लिए भी,
तरस तब तुम जाओगे।
हमे काटकर ,अपना निवास बनाकर भी,
सुख चैन स्वस्थ जीवन न पा पाओगे।
बिना हमारे,
सूरज की तेज गर्मी की आंच
से भी न बच पाओगें।
न मिलेगी तब छाँव तुम्हें,
तब तुम बहुत पछताओगे।
न काटो हमको,
काट कर तुम क्या पाओगे।
अपने ही जीवन के अंत
की कहानी,
तुम खुद लिख जाओगे।
तुच्छ तू रह जायेगा तब,
जीवन हीन होकर।
तब किये ऐसे कर्मो का,
पछतावा ही रह जायेगा,
उस वक़्त चाह कर भी,
ऐसी हरियाली उगा न पाओगें।।
                                    ~प्रियंका"श्री"
                                       4/12/17

11 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 06 दिसम्बर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत आभार यशोदा जी।

    ReplyDelete
  3. बहुत बहुत आभार यशोदा जी।

    ReplyDelete
  4. सत्य कहा आदरणीया इसे समझने की जरुरत है। सुन्दर

    ReplyDelete
  5. जी हाँ ,बहुत बहुत आभार ध्रुव जी।

    ReplyDelete
  6. Bahut sundr rachna
    Man ko chu gai....Waah

    ReplyDelete
  7. बहुत बहुत आभार नीतू जी।

    ReplyDelete
  8. बेहतरीन अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर....

    ReplyDelete

नई शिक्षा नीति

1986 के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में या उसकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया । परन्तु अब नई शिक्षा नीति 2020 का आना एक नई सम्भावनायों को तो...